श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  13.18.89 
महानखो महारोमा महाकोशो महाजट:।
प्रसन्नश्च प्रसादश्च प्रत्ययो गिरिसाधन:॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
486 महानख -- लम्बे नखों वाले नरसिंह, 487 महारोमा -- विशाल केशों वाले वराह रूप, 488 महाकोश -- बड़े पेट वाले, 489 महाजात -- लम्बी जटाओं वाले, 490 प्रसन्न : -- आनन्द में डूबे हुए, 491 प्रसाद : -- आनन्द स्वरूप, 492 प्रत्यय : -- ज्ञान स्वरूप, 493 गिरिसाधन : -- जो पर्वत को युद्ध का साधन बनाता है। 89
 
486 Mahanakha -- Narasimha with long nails, 487 Maharoma -- Varaah form with huge hair, 488 Mahakosh -- one with a big belly, 489 Mahajat -- one with long matted hair, 490 Prasanna : -- immersed in joy, 491 Prasad : -- the embodiment of joy, 492 Pratyaya : -- the form of knowledge, 493 Girisadhan : -- one who makes the mountain a means of war. 89
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)