श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  13.18.86 
महामूर्धा महामात्रो महानेत्रो निशालय:।
महान्तको महाकर्णो महोष्ठश्च महाहनु:॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
462 महामूर्धा - बड़े सिर वाले, 463 महामात्र - बड़े आकार वाले, 464 महानेत्र - बड़े नेत्रों वाले, 465 निशालय - निशा अर्थात् अज्ञान का स्थान, 466 महान्तक - मृत्यु का भी काल, 467 महाकर्ण - बड़े कानों वाले, 468 महोष्ठ - लंबे ओठों वाले, 469 महाहनु - बलवान और बड़ी ठुड्डी वाले । 86॥
 
462 Mahamurdha—having a big head, 463 Mahamatra:—having huge measurements, 464 Mahanetra:—having huge eyes, 465 Nishalaya:—Nisha means the place of ignorance, 466 Mahantak:—death of even death, 467 Mahakarna:—having big ears, 468 Mahoshtha:—having long lips, 469 Mahahanu:—strong. And those with big chins. 86॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)