श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  13.18.85 
कृष्णवर्ण: सुवर्णश्च इन्द्रियं सर्वदेहिनाम्।
महापादो महाहस्तो महाकायो महायशा:॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
455 कृष्णवर्ण:—श्यामवर्ण विष्णु रूप, 456 सुवर्ण:—अच्छे रंग वाला, 457 सर्वदेहिनं इंद्रियम्—सभी देहधारी प्राणियों की इंद्रियां, 458 महापाद:—लंबे पैरों वाला त्रिविक्रम रूप, 459 महाहस्त:—लंबे हाथों वाला, 460 महाकाय:—विश्वरूप, 461 महायशा:—अच्छाई से महान इच्छाएँ. 85॥
 
455 Krishnavarna:—Shyamvarna Vishnu form, 456 Suvarna:—The one with good complexion, 457 Sarvadehinam Indriyam—Indriyas of all embodied beings, 458 Mahapadah—Trivikram form with long legs, 459 Mahahasta:—One with long hands, 460 Mahakaya:—Vishvarupa, 461 Mahayasha:—Great with good wishes. 85॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)