नन्दीश्वरश्च नन्दी च नन्दनो नन्दिवर्द्धन:।
भगहारी निहन्ता च कालो ब्रह्मा पितामह:॥ ७६॥
अनुवाद
378 नन्दीश्वर:—नन्दी नामक पार्षद के स्वामी, 379 नन्दी—नन्दी के स्वरूप, 380 नन्दन:—परम सुख प्रदान करने वाले, 381 नन्दीवर्धन:—ऐश्वर्य की वृद्धि करने वाले, 382 भगहरि—ऐश्वर्य का अपहरण करने वाले, 383 निहंता—मृत्युरूप सबको मारने वाले, 384 काल:—चौसठ कलाओं के धाम, 385 ब्रह्मा—जगत के रचयिता ब्रह्मा, 386 पितामह—प्रजापति के भी पिता । 76॥
378 Nandishwar:—Lord of the Councilor named Nandi, 379 Nandi—The embodiment of Nandi, 380 Nandan:—The one who provides ultimate happiness, 381 Nandivardhan:—The one who increases prosperity, 382 Bhaghari—The one who kidnaps opulence, 383 Nihanta—The one who kills everyone in the form of death, 384 Kaal:—The abode of sixty-four arts, 385 Brahma – Creator of the world Brahma, 386 Pitamah – Father of Prajapati also. 76॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥