Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.18.72: 345 भिक्षु:—संन्यासी, 346 भिक्षुरूप:—श्रीराम-कृष्ण आदि की बाल छवि देखने के लिए साधु का रूप धारण करने वाले, 347 विपन:—आचरण से परे, 348 मृदु:—सौम्य स्वभाव वाले, 349 अव्यय:—अविनाशी, 350 महासेन:—देव-सेनापति कार्तिके स्वरूप, 351 विशाख:—कार्तिकेय के सहायक, 352 षष्ठीभगा:- संवत्सर रूप साठ भागों में विभक्त है जैसे प्रभाव, 353 गवमपति:- इंद्रियों के स्वामी। 72॥ | mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
345 भिक्षु:—संन्यासी, 346 भिक्षुरूप:—श्रीराम-कृष्ण आदि की बाल छवि देखने के लिए साधु का रूप धारण करने वाले, 347 विपन:—आचरण से परे, 348 मृदु:—सौम्य स्वभाव वाले, 349 अव्यय:—अविनाशी, 350 महासेन:—देव-सेनापति कार्तिके स्वरूप, 351 विशाख:—कार्तिकेय के सहायक, 352 षष्ठीभगा:- संवत्सर रूप साठ भागों में विभक्त है जैसे प्रभाव, 353 गवमपति:- इंद्रियों के स्वामी। 72॥
345 Bhikshu:—Sannyasi, 346 Bhikshurup:—Those who assume the form of a monk to see the child image of Shri Ram-Krishna etc., 347 Vipan:—Beyond the behavior, 348 Mridu:—Those with gentle nature, 349 Avyaya:—Indestructible, 350 Mahasen:—Deva-commander Kartike's form, 351 Vishakh:—Kartikeya's assistant, 352 Shashtibhaga:- Samvatsara form divided into sixty parts like Prabhava, 353 Gavampati:- Lord of the senses. 72॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥