Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.18.71: 336 वामदेव:—ऋषि के रूप में वामदेव, 337 वाम:—पापियों के विरोधी, 338 प्राक—सबके आदि, 339 दक्षिण:—कुशल, 340 वामन:—यज्ञ बांधने वाले बौने के रूप में, 341 सिद्धयोगी—सनतकुमार आदि सिद्ध महात्मा, 342 महर्षि:—वशिष्ठ आदि, 343 सिद्धार्थ:—आप्तकम, 344 सिद्धसाधक:—सर्वेवेद और साधक का स्वरूप। 71॥ | mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
336 वामदेव:—ऋषि के रूप में वामदेव, 337 वाम:—पापियों के विरोधी, 338 प्राक—सबके आदि, 339 दक्षिण:—कुशल, 340 वामन:—यज्ञ बांधने वाले बौने के रूप में, 341 सिद्धयोगी—सनतकुमार आदि सिद्ध महात्मा, 342 महर्षि:—वशिष्ठ आदि, 343 सिद्धार्थ:—आप्तकम, 344 सिद्धसाधक:—सर्वेवेद और साधक का स्वरूप। 71॥
336 Vamdev:—Vamdev as a sage, 337 Vam:—adversary of sinners, 338 Prak—everyone's etc., 339 Dakshin:—skilled, 340 Vaman:—one in the form of a dwarf who binds sacrifices, 341 Siddhayogi—Sanatkumar etc. Siddha Mahatma, 342 Maharishi:—Vashishtha etc., 343 Siddhartha:—Aaptakam, 344 Siddhasadhak:—Sirved and The form of a seeker. 71॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥