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mahabharat 13.18.7-9h: मैं भगवान शिव का भक्त हूँ, इसलिए मैं आपको यह वेदरूप सनातन स्तोत्र सुना रहा हूँ। भगवान महादेव के इस सम्पूर्ण नामसमूह का पूर्णतः वर्णन कोई नहीं कर सकता। यदि कोई व्यक्ति योग में निपुण भी हो, तो भी वह सैकड़ों वर्षों में भी भगवान शिव की दिव्य शक्तियों का वर्णन नहीं कर सकता। माधव! जिसका आदि, मध्य और अन्त देवता भी नहीं जान सकते, उसके गुणों का पूर्णतः वर्णन कौन कर सकता है?॥ 7-8 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 7-9h
 
 
श्लोक  13.18.7-9h 
तेन ते श्रावयिष्यामि यत् तद् ब्रह्म सनातनम्।
न शक्यं विस्तरात् कृत्स्नं वक्तुं सर्वस्य केनचित्॥ ७॥
युक्तेनापि विभूतीनामपि वर्षशतैरपि।
यस्यादिर्मध्यमन्तं च सुरैरपि न गम्यते॥ ८॥
कस्तस्य शक्नुयाद् वक्तुं गुणान् कात्‍स्‍न्‍‍‍र्येन माधव।
 
 
अनुवाद
मैं भगवान शिव का भक्त हूँ, इसलिए मैं आपको यह वेदरूप सनातन स्तोत्र सुना रहा हूँ। भगवान महादेव के इस सम्पूर्ण नामसमूह का पूर्णतः वर्णन कोई नहीं कर सकता। यदि कोई व्यक्ति योग में निपुण भी हो, तो भी वह सैकड़ों वर्षों में भी भगवान शिव की दिव्य शक्तियों का वर्णन नहीं कर सकता। माधव! जिसका आदि, मध्य और अन्त देवता भी नहीं जान सकते, उसके गुणों का पूर्णतः वर्णन कौन कर सकता है?॥ 7-8 1/2॥
 
Because I am a devotee of Lord Shiva, I am reciting this eternal hymn which is in the form of Vedas to you. No one can fully describe this entire group of names of Lord Mahadev. Even if a person is adept in Yoga, he cannot describe the divine powers of Lord Shiva even in hundreds of years. Madhava! Who can fully describe the qualities of the one whose beginning, middle and end cannot be known even by the gods?॥ 7-8 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)