श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  13.18.60 
विमोचन: सुसरणो हिरण्यकवचोद्भव:।
मेढ्रजो बलचारी च महीचारी स्रुतस्तथा॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
250 विमोचन:—संसार के बंधन से छुड़ाने वाले, 251 सुशरण:—उत्तम आश्रय, 252 हिरण्य-कवचोद्भव:—हिरण्यगर्भ का उद्गम स्थान, 253 मेधराज:—, 254 बलचारी—बल का संचार करने वाले, 255 महीचारी—सम्पूर्ण पृथ्वी पर विचरण करने वाले, 256 श्रुत:—सर्वत्र पहुँचने वाले । 60॥
 
250 Vimochan:—the one who frees from the bondage of the world, 251 Susarana:—the best shelter, 252 Hiranya-Kavachodbhava:—the place of origin of Hiranyagarbha, 253 Medhraj:—, 254 Balchari—one who communicates force, 255 Mahichari—one who roams over the entire earth, 256 Sruta:—reached everywhere. 60॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)