Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.18.59: 241 नक्षत्रविग्रहमति:—नक्षत्रों, ग्रहों, तारों आदि की गति को जानने वाला, 242 गुणबुद्धि:—गुणों में बुद्धि का प्रयोग करने वाला, 243 लय:—विनाश का स्थान, 244 आगम:—जानने योग्य न होने वाला, 245 प्रजापति:—प्रजा का स्वामी, 246 विश्वबाहु:—सर्वत्र भुजाओं वाला, 247 विभाग:—विभाग रूप, 248 सर्वगा:—सर्वव्यापी, 249 अनमुख:—बिना मुख वाला । 59॥ | mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
241 नक्षत्रविग्रहमति:—नक्षत्रों, ग्रहों, तारों आदि की गति को जानने वाला, 242 गुणबुद्धि:—गुणों में बुद्धि का प्रयोग करने वाला, 243 लय:—विनाश का स्थान, 244 आगम:—जानने योग्य न होने वाला, 245 प्रजापति:—प्रजा का स्वामी, 246 विश्वबाहु:—सर्वत्र भुजाओं वाला, 247 विभाग:—विभाग रूप, 248 सर्वगा:—सर्वव्यापी, 249 अनमुख:—बिना मुख वाला । 59॥
241 Nakshatravigrahmati:—one who knows the movement of constellations, planets, stars, etc., 242 Gunabuddhi:—one who uses intelligence in qualities, 243 Lay:—place of destruction, 244 Agam:—not capable of being known, 245 Prajapati:—lord of subjects, 246 Vishvabahu:—one with arms everywhere, 247 Vibhagah:—department form, 248 Sarvaga:—omnipresent, 249 Anmukh:- without a face. 59॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥