Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.18.55: 207 विश्वक्सेन:—जो सर्वत्र दैत्यों की सेना को भगा देते हैं, 208 हरि:—जो समस्त विघ्नों को पार कर जाते हैं, 209 यज्ञ:—जो यज्ञस्वरूप हैं, 210 संयुगपीडवाहन:—जिनके पास युद्ध में पीड़ारहित वाहन है, 211 तीक्ष्णतप:—जो दुःख सहित तापस्वरूप हैं, 212 हर्यस्व:—जिनके पास हरे रंग के घोड़े हैं, 213 सह्य:—जो समस्त प्राणियों के मित्र हैं, 214 कर्मकालवित्त:—जो कर्मों के समय को ठीक से जानते हैं ॥55॥ | mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
207 विश्वक्सेन:—जो सर्वत्र दैत्यों की सेना को भगा देते हैं, 208 हरि:—जो समस्त विघ्नों को पार कर जाते हैं, 209 यज्ञ:—जो यज्ञस्वरूप हैं, 210 संयुगपीडवाहन:—जिनके पास युद्ध में पीड़ारहित वाहन है, 211 तीक्ष्णतप:—जो दुःख सहित तापस्वरूप हैं, 212 हर्यस्व:—जिनके पास हरे रंग के घोड़े हैं, 213 सह्य:—जो समस्त प्राणियों के मित्र हैं, 214 कर्मकालवित्त:—जो कर्मों के समय को ठीक से जानते हैं ॥55॥
207 Vishvaksena:—one who drives away the army of demons everywhere, 208 Hari:—one who overcomes all the obstacles, 209 Yajna:—one who is the form of Yagya, 210 Sanyugapidavahana:—who has a vehicle without pain in the war, 211 Tikshnatapa:—the one who is in the form of heat with sorrow, 212 Haryasva:—one with green colored horses, 213 Sahayah—friend of all living beings, 214 KarmakalaVitta. -Those who know the exact timing of actions. 55॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥