Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.18.50: 165 बहुभूत:- जो सृष्टि में एक से अनेक हो जाता है, 166 बहुधर:- जो अनेक को धारण करता है, 167 स्वर्भानु:-, 168 अमित:- अनंत, 169 गति:- जो भक्तों और मुक्तात्माओं को प्राप्त हो सके, 170 नृत्यप्रिय:- जो तांडव नृत्य को प्रिय है, वह शिव है, 171 नित्यानार्त:- जो निरंतर नृत्य करता है, 172 नृरक्षक:- जो स्वयं नाचता है और दूसरों को नचाता है, 173 सर्वलाल:- जो सभी से प्रेम करता है। | mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
165 बहुभूत:- जो सृष्टि में एक से अनेक हो जाता है, 166 बहुधर:- जो अनेक को धारण करता है, 167 स्वर्भानु:-, 168 अमित:- अनंत, 169 गति:- जो भक्तों और मुक्तात्माओं को प्राप्त हो सके, 170 नृत्यप्रिय:- जो तांडव नृत्य को प्रिय है, वह शिव है, 171 नित्यानार्त:- जो निरंतर नृत्य करता है, 172 नृरक्षक:- जो स्वयं नाचता है और दूसरों को नचाता है, 173 सर्वलाल:- जो सभी से प्रेम करता है।
165 Bahubhoot:- One who becomes many from one during the creation, 166 Bahudhar:- One who holds many, 167 Svarbhanu:-, 168 Amit:- Infinite, 169 Gati:- One who can be attained by the devotees and the liberated souls, 170 Nrityapriya:- One who loves the Tandava dance, is Shiva, 171 Nityanart:- One who dances continuously, 172 Nrakshak:- One who dances and makes others dance, 173 Sarvalalas:- One who loves everyone. 50.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥