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mahabharat 13.18.49: 157 कालयोगी - जो योगबल से काल को भी जीत लेते हैं, 158 महानाद: - अनाहत ध्वनि स्वरूप, 159 सर्वकाम: - समस्त कामनाओं से परिपूर्ण, 160 चतुष्पथ: - जिनकी सिद्धियाँ ज्ञानयोग, भक्तियोग, कर्मयोग और अष्टांगयोग - ये चार मार्ग हैं, वे महादेव हैं, 161 निशाचर: - जो रात्रि में विचरण करते हैं, 162 प्रेतचारी: - जो भूतों के साथ विचरण करते हैं, 163 भूतचारी- जो भूतों के साथ विचरण करते हैं, 164 महेश्वर: - इंद्र और अन्य लोकेश्वरों से भी महान।   |   mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  13.18.49 
कालयोगी महानाद: सर्वकामश्चतुष्पथ:।
निशाचर: प्रेतचारी भूतचारी महेश्वर:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
157 कालयोगी - जो योगबल से काल को भी जीत लेते हैं, 158 महानाद: - अनाहत ध्वनि स्वरूप, 159 सर्वकाम: - समस्त कामनाओं से परिपूर्ण, 160 चतुष्पथ: - जिनकी सिद्धियाँ ज्ञानयोग, भक्तियोग, कर्मयोग और अष्टांगयोग - ये चार मार्ग हैं, वे महादेव हैं, 161 निशाचर: - जो रात्रि में विचरण करते हैं, 162 प्रेतचारी: - जो भूतों के साथ विचरण करते हैं, 163 भूतचारी- जो भूतों के साथ विचरण करते हैं, 164 महेश्वर: - इंद्र और अन्य लोकेश्वरों से भी महान।
 
157 Kalayogi - one who conquers even time with the power of yoga, 158 Mahanad: - Anahat sound form, 159 Sarvakaam: - Complete with all desires, 160 Chatushpath: - Those whose attainments are Gyan Yoga, Bhakti Yoga, Karma Yoga and Ashtanga Yoga - these are the four paths, they are Mahadev, 161 Nishachar: - One who roams around at night, 162 Pretachari: - One who roams with ghosts, 163 Bhootchaari-one who wanders with ghosts, 164 Maheshwar:-greater than Indra and other Lokeshwars.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)