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श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  13.18.47 
त्रिजटी चीरवासाश्च रुद्र: सेनापतिर्विभु:।
अहश्चरो नक्तंचरस्तिग्ममन्यु: सुवर्चस:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
141 त्रिजटी: तीन जटाओं वाला, 142 चिरवास: छाल के वस्त्र धारण करने वाला, 143 रुद्र: शोक को दूर करने वाला, 144 सेनापति: सेना का सेनापति, 145 विभु: सर्वव्यापी, 146 अहंकार: दिन में विचरण करने वाला, 147 नक्तंचर: रात्रि में विचरण करने वाला, 148 तिग्मन्यु: तीव्र स्वभाव वाला, 149 सुवर्चस: सुंदर कांति वाला। 47।
 
141 Trijati: one having three matted locks, 142 Chiravasa: one wearing bark clothes, 143 Rudra: one who drives away sorrow, 144 Senapati: commander of the army, 145 Vibhu: omnipresent, 146 Ahacchar: one who moves during the day, 147 Naktanchar: one who moves during the night, 148 Tigmamanyu: one with sharp temper, 149 Suvarchas: one having beautiful radiance. 47.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)