श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  13.18.40 
योगी योज्यो महाबीजो महारेता महाबल:।
सुवर्णरेता: सर्वज्ञ: सुबीजो बीजवाहन:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
82 योगी - योगनिष्ठ, 83 योजक: - मानसिक योग का आश्रय, 84 महाबीज: - महान कारण, 85 महारेता: - महान वीर्य से युक्त शक्तिशाली, 86 महाबल: - महान पराक्रम से युक्त, 87 सुवर्णरेता: - अग्निस्वरूप, 88 सर्वज्ञ: - सब कुछ जानने वाला, 89 सुबिज: - उत्तम बीजस्वरूप, 90 बीजवाहन: - जीवों के संस्कार रूपी बीजों को धारण करने वाला । 40॥
 
82 Yogi - Yoginishtha, 83 Yojya: - shelter of mental yoga, 84 Mahabeej: - great cause, 85 Mahareta: - powerful with great semen, 86 Mahabal: - full of great power, 87 Suvarnareta: - form of fire, 88 Sarvjna: - one who knows everything, 89 Subij: - best seed form, 90 Beejvahan: - one who carries the seeds in the form of sanskars of living beings. 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)