लोकपालोऽन्तर्हितात्मा प्रसादो हयगर्दभि:।
पवित्रं च महांश्चैव नियमो नियमाश्रित:॥ ३६॥
अनुवाद
46 लोकपाल:—लोगों का रक्षक, 47 अन्तरात्मा—अदृश्य स्वरूप, 48 प्रसाद:—सुख से पूर्ण, 49 हयगर्दभि:—खच्चर द्वारा खींचे जाने वाले रथ पर सवार, 50 पवित्रम्—शुद्ध वस्तु रूप, 51 महान्—पूज्य, 52 नियम:—शौच, संतोष आदि नियमों का पालन करने से प्राप्त होने योग्य, 53 नियमश्री:—नियमों पर आश्रित। 36॥
46 Lokpal:—protector of the people, 47 inner soul—invisible form, 48 prasad:—full of happiness, 49 haygardabhi:—one who rides on a chariot drawn by a mule, 50 pavitram—pure object form, 51 mahan—worshipable, 52 niyama:—capable of being achieved by following the rules of defecation, satisfaction etc., 53 niyamashri:—being dependent on the rules. 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥