ब्रह्मलोकादयं स्वर्गे स्तवराजोऽवतारित:।
यतस्तण्डि: पुरा प्राप तेन तण्डिकृतोऽभवत्॥ २३॥
अनुवाद
यह स्तवराज ब्रह्मलोक से स्वर्गलोक में लाया गया था। इसे सर्वप्रथम तण्डि मुनि ने ग्रहण किया था, इसलिए यह 'तण्डीकृत सहस्रनामस्तवराज' के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
This Stavaraj was brought down from Brahmaloka to Swargaloka. It was first received by Tandi Muni, hence it became famous as 'Tandikrit Sahasranamastavaraj'.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥