Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.18.20-22: यह सहस्रनाम स्तोत्र, जिसे जीवन के अंतिम क्षणों में भी जानने से मनुष्य परम आनंद को प्राप्त कर लेता है, परम पवित्र, मंगलकारी, बुद्धिवर्धक, मंगलकारी और उत्कृष्ट है। प्राचीन काल में समस्त लोकों के पितामह ब्रह्माजी ने इस स्तोत्र का आविष्कार करके इसे समस्त दिव्य स्तोत्रों के राजा के रूप में स्थापित किया था। तभी से महात्मा ईश्वर महादेव का यह पूजित स्तोत्र संसार में 'स्तवराज' के नाम से प्रसिद्ध हुआ। 20-22॥ | mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह सहस्रनाम स्तोत्र, जिसे जीवन के अंतिम क्षणों में भी जानने से मनुष्य परम आनंद को प्राप्त कर लेता है, परम पवित्र, मंगलकारी, बुद्धिवर्धक, मंगलकारी और उत्कृष्ट है। प्राचीन काल में समस्त लोकों के पितामह ब्रह्माजी ने इस स्तोत्र का आविष्कार करके इसे समस्त दिव्य स्तोत्रों के राजा के रूप में स्थापित किया था। तभी से महात्मा ईश्वर महादेव का यह पूजित स्तोत्र संसार में 'स्तवराज' के नाम से प्रसिद्ध हुआ। 20-22॥
This Sahasranama Stotra, which by knowing it even in the last moments of life, enables a person to attain supreme bliss, is most sacred, auspicious, intellectually enhancing, auspicious and excellent. In ancient times, Brahmaji, the grandfather of all the worlds, had invented this stotra and established it as the king of all divine stotras. Since then, this worshiped hymn of Mahatma Ishwar Mahadev became famous in the world by the name of 'Stavraj'. 20-22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥