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mahabharat 13.18.175: यह परम रहस्यमय स्तोत्र ब्रह्माजी के हृदय में स्थित है। ब्रह्माजी ने इसका उपदेश इन्द्र को दिया और इन्द्र ने इसका उपदेश मृत्यु को दिया ॥175॥   |   mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.18.175 
एतद् रहस्यं परमं ब्रह्मणो हृदि संस्थितम्।
ब्रह्मा प्रोवाच शक्राय शक्र: प्रोवाच मृत्यवे॥ १७५॥
 
 
अनुवाद
यह परम रहस्यमय स्तोत्र ब्रह्माजी के हृदय में स्थित है। ब्रह्माजी ने इसका उपदेश इन्द्र को दिया और इन्द्र ने इसका उपदेश मृत्यु को दिया ॥175॥
 
This most mysterious stotra is situated in the heart of Brahmaji. Lord Brahma preached this to Indra and Indra preached it to death. 175॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)