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mahabharat 13.18.172: यह परम पवित्र, पुण्यदायक और समस्त पापों का नाश करने वाला है। यह योग, मोक्ष, स्वर्ग और संतोष - सब कुछ देता है ॥172॥   |   mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.18.172 
इदं पुण्यं पवित्रं च सर्वदा पापनाशनम्।
योगदं मोक्षदं चैव स्वर्गदं तोषदं तथा॥ १७२॥
 
 
अनुवाद
यह परम पवित्र, पुण्यदायक और समस्त पापों का नाश करने वाला है। यह योग, मोक्ष, स्वर्ग और संतोष - सब कुछ देता है ॥172॥
 
It is the most pure, meritorious and destroyer of all sins. It gives everything - Yoga, Moksha, heaven and satisfaction. ॥ 172॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)