श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 169
 
 
श्लोक  13.18.169 
एवमन्ये विकुर्वन्ति देवा: संसारमोचनम्।
मनुष्याणामृते देवं नान्या शक्तिस्तपोबलम्॥ १६९॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार भगवान् की स्तुति करके अन्य देवता भी संसार में अपने बंधनों को नष्ट कर देते हैं; क्योंकि महादेव की शरणागति के अतिरिक्त और कोई ऐसी शक्ति या तप का बल नहीं है जिससे मनुष्य संसार के बंधन से मुक्त हो सके॥169॥
 
In the same way, by praising the Lord, the other gods also destroy their bondage in the world; because apart from surrendering to Mahadev there is no other power or strength of penance by which a human being can be freed from the bondage of the world.॥ 169॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)