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mahabharat 13.18.165: जिसे भाग्य से समस्त साधन प्राप्त हो गए हैं, वह संसार के हित के लिए भगवान शिव की पूर्ण एवं अनन्य भक्ति प्राप्त करता है ॥165॥   |   mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.18.165 
उत्पन्ना च भवे भक्तिरनन्या सर्वभावत:।
भाविन: कारणे चास्य सर्वयुक्तस्य सर्वथा॥ १६५॥
 
 
अनुवाद
जिसे भाग्य से समस्त साधन प्राप्त हो गए हैं, वह संसार के हित के लिए भगवान शिव की पूर्ण एवं अनन्य भक्ति प्राप्त करता है ॥165॥
 
The one who has been blessed with all the resources by luck, gets complete and exclusive devotion to Lord Shiva for the sake of the world. 165॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)