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mahabharat 13.18.158: यह उत्तम वेदतुल्य स्तोत्र शिव के परम स्वरूप परब्रह्म को लक्ष्य बनाता है। ऋषिगण और देवता भी इसके माध्यम से भगवान शिव की स्तुति करते हैं। 158॥   |   mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 158
 
 
श्लोक  13.18.158 
एतद्धि परमं ब्रह्म परं ब्रह्माधिगच्छति।
ऋषयश्चैव देवाश्च स्तुवन्त्येतेन तत्परम्॥ १५८॥
 
 
अनुवाद
यह उत्तम वेदतुल्य स्तोत्र शिव के परम स्वरूप परब्रह्म को लक्ष्य बनाता है। ऋषिगण और देवता भी इसके माध्यम से भगवान शिव की स्तुति करते हैं। 158॥
 
This excellent Veda-like stotra makes Parabrahma, the supreme form of Shiva, its target. Sages and gods also praise Lord Shiva through him. 158॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)