श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 142
 
 
श्लोक  13.18.142 
कला: काष्ठा लवा मात्रा मुहूर्ताह: क्षपा: क्षणा:।
विश्वक्षेत्रं प्रजाबीजं लिङ्गमाद्यस्तु निर्गम:॥ १४२॥
 
 
अनुवाद
910 कला:, 911 काष्ठा:, 912 लव:, 913 मात्रा:—(आदि कलावायव रूप), 914 मुहूर्त: क्षप:—मुहूर्त, दिन और रात रूप, 915 क्षण:—क्षण रूप, 916 विश्वक्षेत्रम्—ब्रह्माण्ड रूपी वृक्ष का आधार, 917 प्रजाबीजम्—विषयों का कारण रूप, 918 लिंगम- महत्तत्त्व रूप, 919 अद्यो निरागम: सबसे पहले प्रकट होने वाले। 142॥
 
910 Kala:, 911 Kashta:, 912 Lava:, 913 Matra:—(etc. Kalavayava form), 914 Muhurtah: Kshapa:—Muhurta, day and night form, 915 Kshana:—moment form, 916 Vishwakshetram—base of the tree in the form of the universe, 917 Prajabeejam—reason form of the subjects, 918 Lingam—mahatattva form, 919 Adyo Niragam: The first to appear. 142॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)