Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.18.133: 843 सहस्रबाहु:-हजारों भुजाओं वाले, 844 सर्वांग:-सभी अंगों से परिपूर्ण, 845 शरण्य:-शरण लेने में सक्षम, 846 सर्वलोककृत-सभी लोकों के निर्माता, 847 पवित्रराम:-परम पवित्र, 848 त्रिक्कुनमंत्र:-त्रिपदा गायत्री रूप, 849 कनिष्ठ:-अदिति के पुत्रों में छोटे, विष्णु के रूप में वामन, 850 कृष्णपिंगल: श्याम-गौर हरि-हर-मूर्ति। 133॥ | mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
843 सहस्रबाहु:-हजारों भुजाओं वाले, 844 सर्वांग:-सभी अंगों से परिपूर्ण, 845 शरण्य:-शरण लेने में सक्षम, 846 सर्वलोककृत-सभी लोकों के निर्माता, 847 पवित्रराम:-परम पवित्र, 848 त्रिक्कुनमंत्र:-त्रिपदा गायत्री रूप, 849 कनिष्ठ:-अदिति के पुत्रों में छोटे, विष्णु के रूप में वामन, 850 कृष्णपिंगल: श्याम-गौर हरि-हर-मूर्ति। 133॥
843 Sahasrabahu:—having thousands of arms, 844 Sarvaang:—full of all organs, 845 Sharanya:—capable of taking refuge, 846 Sarvalokkrit—the creator of all the worlds, 847 Pavitraam—the most holy, 848 Trikkunmantra:—Tripada Gayatri form, 849 Kanishtha:—the younger among Aditi's sons, Vishnu in the form of Vamana, 850 Krishnapingal: Shyam-Gaur Hari-Har-Murti. 133॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥