825 छत्रम्—जो पाप और ताप से छत्र के समान रक्षा करता है, 826 सुछत्र—छत्र का सर्वोत्तम रूप, 827 विख्यातो लोका—जो जगत् का सुविख्यात रूप है, 828 सर्वाश्रयः क्रम—सबकी मूल गति, 829 मुण्ड—जिसका सिर मुँड़ा हुआ है, 830 विरूपः—जो घोर रूप वाला है, 831 विरुक्त—जिसके पूर्ण विपरीत कर्म हैं, 832 दण्डी-दण्डधारी, 833 कुण्डी-खप्परधारी, 834 विकुर्वनः-अलभ्यद्वार ॥ 131॥
825 Chhatram—one who protects from sin and heat like an umbrella, 826 Suchhatra:—the best form of umbrella, 827 Vikhyato loka:—well-known form of the world, 828 Sarvashrayah Krama:—the basic motion of all, 829 Mund:—with shaved head, 830 Virupah:—one with a severe form, 831 Virukta:—one who possesses complete opposite actions, 832 दंदी-danddhaari, 833 कुंदी-खप्परधारी, 834 विकुर्वनः-अलभ्याद्वार ॥ 131॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥