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mahabharat 13.18.125: 779 आरोहण:- परम पद पर चढ़ने का द्वार, 780 अधिरोहण:- परम पद पर विराजमान, 781 शीलधारी:- उत्तम चरित्र वाले, 782 महायश:- महान यश से युक्त, 783 सेनाकल्प:- सेना का आभूषण, 784 महाकल्प:- बहुमूल्य आभूषणों से विभूषित, 785 योग:- मानसिक वृत्तियों का निरोध, 786 युगकार:- युग का प्रारंभ करने वाले, 787 हरि:- भक्तों के दुःखों को दूर करने वाले। 125.   |   mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल  »  श्लोक 125
 
 
श्लोक  13.18.125 
आरोहणोऽधिरोहश्च शीलधारी महायशा:।
सेनाकल्पो महाकल्पो योगो युगकरो हरि:॥ १२५॥
 
 
अनुवाद
779 आरोहण:- परम पद पर चढ़ने का द्वार, 780 अधिरोहण:- परम पद पर विराजमान, 781 शीलधारी:- उत्तम चरित्र वाले, 782 महायश:- महान यश से युक्त, 783 सेनाकल्प:- सेना का आभूषण, 784 महाकल्प:- बहुमूल्य आभूषणों से विभूषित, 785 योग:- मानसिक वृत्तियों का निरोध, 786 युगकार:- युग का प्रारंभ करने वाले, 787 हरि:- भक्तों के दुःखों को दूर करने वाले। 125.
 
779 Aarohan:- The gateway to ascend the supreme position, 780 Adhiroha:- Seated on the supreme position, 781 Sheeldhari:- Possessed of good character, 782 Mahayashah:- Endowed with great fame, 783 Senakalp:- The ornament of the army, 784 Mahakalp:- Adorned with precious ornaments, 785 Yoga:- The restraint of the mental tendencies, 786 Yugkar:- Starter of the era, 787 Hari:- One who takes away the sorrows of the devotees. 125.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)