Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.18.118: 727 महाकेतु:—धर्मस्वरूप, महान ध्वजाधारी, 728 महाधातु:—सुवर्ण रूप, 729 नाइकासानुचर:—मेरुगिरि के अनेक शिखरों पर विचरण करने वाले, 730 चल:—किसी के द्वारा पकड़े न जाने वाले, 731 अपनीहया:—प्रार्थना के योग्य, 732 अध्यम:—आज्ञा देने वाले, 733 सर्वगंधसुखव:—सभी दुर्गन्धयुक्त विषयों के सुख की प्राप्ति करने वाले। जो इसे घटित कराते हैं। | mahabharat अध्याय 13.18: शिवसहस्रनामस्तोत्र और उसके पाठका फल । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
727 महाकेतु:—धर्मस्वरूप, महान ध्वजाधारी, 728 महाधातु:—सुवर्ण रूप, 729 नाइकासानुचर:—मेरुगिरि के अनेक शिखरों पर विचरण करने वाले, 730 चल:—किसी के द्वारा पकड़े न जाने वाले, 731 अपनीहया:—प्रार्थना के योग्य, 732 अध्यम:—आज्ञा देने वाले, 733 सर्वगंधसुखव:—सभी दुर्गन्धयुक्त विषयों के सुख की प्राप्ति करने वाले। जो इसे घटित कराते हैं।
727 Mahaketu:—the form of religion, having the great flag, 728 Mahadhatu:—golden form, 729 Naikasanuchar:—one who wanders on the many peaks of Merugiri, 730 chal:—not being caught by anyone, 731 apnihayaya:—worthy of prayer, 732 adhyam:—one who grants orders, 733 sarvagandhsukhavah:—attainment of happiness of all the odorous subjects. Those who make it happen.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥