| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन » श्लोक 8 |
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| | | | श्लोक 13.179.8  | अस्य चाधोऽथान्तरिक्षं दिवं च
दिशश्चतस्रो विदिशश्चतस्र:।
सृष्टिस्तथैवेयमनुप्रसूता
स निर्ममे विश्वमिदं पुराणम्॥ ८॥ | | | | | | अनुवाद | | अन्तरिक्ष, स्वर्ग, चारों दिशाएँ और चारों कोण - ये सब भगवान श्रीकृष्ण के अधीन हैं। उन्हीं से सृष्टि की परम्परा चली है और उन्होंने ही इस प्राचीन ब्रह्माण्ड की रचना की है॥8॥ | | | | Space, heaven, the four directions and the four angles - all these are below Lord Krishna. It is from Him that the tradition of creation has been established and He is the one who has created this ancient universe. ॥ 8॥ | | ✨ ai-generated | | |
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