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mahabharat 13.179.7: श्रीकृष्ण ही इस पृथ्वी, आकाश और स्वर्ग की रचना करने वाले हैं। पृथ्वी उनके शरीर से उत्पन्न हुई है। वे भयंकर वराह के रूप में प्रकट हुए और उन्हीं पुराण-पुरुष ने पर्वतों और दिशाओं की रचना की है। 7.   |   mahabharat अध्याय 13.179: भीष्मजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  13.179.7 
कृष्ण: पृथ्वीमसृजत् खं दिवं च
कृष्णस्य देहान्मेदिनी सम्बभूव।
वराहोऽयं भीमबल: पुराण:
स पर्वतान् व्यसृजद् वै दिशश्च॥ ७॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण ही इस पृथ्वी, आकाश और स्वर्ग की रचना करने वाले हैं। पृथ्वी उनके शरीर से उत्पन्न हुई है। वे भयंकर वराह के रूप में प्रकट हुए और उन्हीं पुराण-पुरुष ने पर्वतों और दिशाओं की रचना की है। 7.
 
Sri Krishna is the one who created this earth, sky and heaven. Earth has emerged from his body. He appeared in the form of a fierce boar and this same Puran-Purush has created the mountains and directions. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)