श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.179.6 
अहं ह्येनं वेद्मि तत्त्वेन कृष्णं
योऽयं हि यच्चास्य बलं पुराणम्।
अमेयात्मा केशव: कौरवेन्द्र
सोऽयं धर्मं वक्ष्यति संशयेषु॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मैं श्रीकृष्ण के स्वरूप और उनकी प्राचीन शक्ति को भली-भाँति जानता हूँ। हे कौरवराज! भगवान श्रीकृष्ण अपरिमेय हैं; अतः जब कभी तुम्हारे मन में कोई संशय उत्पन्न होगा, तब वे ही तुम्हें धर्म का उपदेश देंगे॥6॥
 
I know exactly the nature of Shri Krishna and his ancient power. O King of Kauravas! Lord Shri Krishna is immeasurable; therefore, whenever you have any doubts in your mind, he alone will preach you the Dharma.॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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