श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.179.5 
उक्ता धर्मा ये पुराणे महान्तो
राजन् विप्राणां क्षत्रियाणां विशां च।
तथा शूद्राणां धर्ममुपासते च
शेषं कृष्णादुपशिक्षस्व पार्थ॥ ५॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! मैंने तुम्हें पुराणों में वर्णित ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र के विभिन्न धर्म तथा सभी वर्णों के लोगों के धर्म बता दिए हैं। अब जो कुछ शेष रह गया है, उसे भगवान कृष्ण से सीखो।
 
Partha! I have told you the different religions of Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas and Shudras mentioned in the Puranas and the religions followed by people of all castes. Now whatever is left, learn it from Lord Krishna.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas