| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन » श्लोक 43 |
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| | | | श्लोक 13.179.43  | शुभाशुभं स्थावरं जङ्गमं च
विष्वक्सेनात् सर्वमेतत् प्रतीहि।
यद् वर्तते यच्च भविष्यतीह
सर्वं ह्येतत् केशवं त्वं प्रतीहि॥ ४३॥ | | | | | | अनुवाद | | इस बात पर विश्वास करो कि यह सम्पूर्ण जगत्, चाहे वह अच्छा हो या बुरा, स्थावर हो या जंगम, श्री कृष्ण से ही उत्पन्न हुआ है। भूत, भविष्य और वर्तमान, ये सब श्री कृष्ण के ही स्वरूप हैं। इसे तुम भली-भाँति समझ लो॥ 43॥ | | | | Believe in the fact that this entire universe, whether it is good or bad, mobile or immobile, has originated from Shri Krishna. The past, the future and the present are all forms of Shri Krishna. You should understand this very well.॥ 43॥ | | ✨ ai-generated | | |
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