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श्लोक 13.179.41  |
स स्थावरं जङ्गमं चैवमेत-
च्चतुर्विधं लोकमिमं च कृत्वा।
ततो भूमिं व्यदधात् पञ्चबीजां
द्यौ: पृथिव्यां धास्यति भूरि वारि॥ ४१॥ |
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| अनुवाद |
| उन्होंने गर्भ आदि चार प्रकार के प्राणियों से युक्त इस चराचर जगत् की रचना करके चतुर्विध जगत् के बीजरूप - समुदाय और कर्म - इन पाँचों को उत्पन्न किया। वे आकाशरूप होकर इस पृथ्वी पर प्रचुर जल की वर्षा करते हैं। 41॥ |
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| By creating this living world consisting of four types of creatures like womb etc., he created the seed role of the fourfold world - community and karma - these five. They become the form of sky and rain abundant water on this earth. 41॥ |
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