श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  13.179.41 
स स्थावरं जङ्गमं चैवमेत-
च्चतुर्विधं लोकमिमं च कृत्वा।
ततो भूमिं व्यदधात् पञ्चबीजां
द्यौ: पृथिव्यां धास्यति भूरि वारि॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने गर्भ आदि चार प्रकार के प्राणियों से युक्त इस चराचर जगत् की रचना करके चतुर्विध जगत् के बीजरूप - समुदाय और कर्म - इन पाँचों को उत्पन्न किया। वे आकाशरूप होकर इस पृथ्वी पर प्रचुर जल की वर्षा करते हैं। 41॥
 
By creating this living world consisting of four types of creatures like womb etc., he created the seed role of the fourfold world - community and karma - these five. They become the form of sky and rain abundant water on this earth. 41॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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