| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन » श्लोक 39 |
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| | | | श्लोक 13.179.39  | विश्वावासं निर्गुणं वासुदेवं
संकर्षणं जीवभूतं वदन्ति।
तत: प्रद्युम्नमनिरुद्धं चतुर्थ-
माज्ञापयत्यात्मयोनिर्महात्मा॥ ३९॥ | | | | | | अनुवाद | | ये जगत् के धाम हैं और निर्गुण हैं। ये वासुदेव, जीवभूत संकर्षण, प्रद्युम्न और चौथे अनिरुद्ध कहलाते हैं। ये स्वयंभू भगवान् सबको अपने अधीन रखते हैं। 39॥ | | | | These are the abodes of the universe and are devoid of any qualities. These are called Vasudev, Jeevabhuta Sankarshana, Pradyumna and the fourth one Aniruddha. This self-realized God keeps everyone under his command. 39॥ | | ✨ ai-generated | | |
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