| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन » श्लोक 38 |
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| | | | श्लोक 13.179.38  | ऋतूनुत्पातान् विविधान्यद्भुतानि
मेघान् विद्युत्सर्वमैरावतं च।
सर्वं कृष्णात् स्थावरं जङ्गमं च
विश्वात्मानं विष्णुमेनं प्रतीहि॥ ३८॥ | | | | | | अनुवाद | | ऋतुएँ, नाना प्रकार की विपत्तियाँ, अनेक अद्भुत वस्तुएँ, बादल, बिजली, ऐरावत तथा समस्त जड़-चेतन जगत् उन्हीं से उत्पन्न हुए हैं। उन्हीं को सम्पूर्ण जगत् का आत्मा समझो - विष्णु॥38॥ | | | | Seasons, various types of calamities, numerous wonderful things, clouds, lightning, Airavat and the entire animate and inanimate world have originated from Him. Consider Him to be the soul of the entire universe – Vishnu. ॥ 38॥ | | ✨ ai-generated | | |
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