Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.179.37: ये जगत्धारी श्रीकृष्ण पूर्व दिशा में परम तेजस्वी सूर्य के रूप में प्रकट होते हैं। जिनके प्रकाश से सम्पूर्ण जगत प्रकाशित होता है। ये ही समस्त प्राणियों के उद्गम स्थान हैं। प्राचीन काल में इन्होंने ही सर्वप्रथम जल की रचना की थी और तत्पश्चात् सम्पूर्ण जगत् की रचना की थी। 37॥ | mahabharat अध्याय 13.179: भीष्मजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये जगत्धारी श्रीकृष्ण पूर्व दिशा में परम तेजस्वी सूर्य के रूप में प्रकट होते हैं। जिनके प्रकाश से सम्पूर्ण जगत प्रकाशित होता है। ये ही समस्त प्राणियों के उद्गम स्थान हैं। प्राचीन काल में इन्होंने ही सर्वप्रथम जल की रचना की थी और तत्पश्चात् सम्पूर्ण जगत् की रचना की थी। 37॥
This world-wearing Shri Krishna appears in the east in the form of the most luminous Sun. Whose light illuminates the whole world. These are the places of origin of all living beings. In ancient times, he had first created water and then created the entire world. 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥