श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  13.179.33 
चन्द्रादित्यौ ग्रहनक्षत्रतारा:
सर्वाणि दर्शान्यथ पौर्णमासम्।
नक्षत्रयोगा ऋतवश्च पार्थ
विष्वक्सेनात् सर्वमेतत् प्रसूतम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! चन्द्रमा, सूर्य, ग्रह, नक्षत्र, तारे, अमावस्या, पूर्णिमा, नक्षत्र और ऋतुएँ - ये सब श्रीकृष्ण से उत्पन्न हुए हैं ॥33॥
 
Parth! Moon, Sun, planets, constellations, stars, new moon, full moon, constellations and seasons – all of these originated from Shri Krishna. 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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