श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  13.179.32 
स वत्सर: स ऋतु: सोऽर्धमास:
सोऽहोरात्र: स कला वै स काष्ठा:।
मात्रा मुहूर्ताश्च लवा: क्षणाश्च
विष्वक्सेन: सर्वमेतत् प्रतीहि॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
संवत्सर, ऋतु, पक्ष, दिन-रात, कला, काष्ठ, मात्रा, शुभ समय, प्रेम और क्षण - इन सबको श्रीकृष्ण का स्वरूप समझो ॥32॥
 
Samvatsar, season, side, day and night, art, wood, quantity, auspicious time, love and moment - consider all these as the form of Shri Krishna. 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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