श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  13.179.31 
ज्योतींषि शुक्लानि हि सर्वलोके
त्रयो लोका लोकपालास्त्रयश्च।
त्रयोऽग्नयो व्याहृतयश्च तिस्र:
सर्वे देवा देवकीपुत्र एव॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
वे समस्त लोकों के तेजस्वी प्रकाश हैं और तीनों लोक, तीनों लोकपाल, त्रिविध अग्नि, तीनों व्याहृतियाँ तथा समस्त देवता भी ये देवकीनन्दन श्रीकृष्ण ही हैं॥31॥
 
He is the bright light of all the worlds and the three worlds, the three Lokpals, the threefold fire, the three Vyahritis and all the gods are also this Devkinandan Shri Krishna. 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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