श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.179.3 
भीष्म उवाच
एष ते केशव: सर्वमाख्यास्यति महामति:।
व्युष्टिं ब्राह्मणपूजायां दृष्टव्युष्टिर्महाव्रत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - युधिष्ठिर! इन महान व्रत-भक्तों ने परम बुद्धिमान भगवान श्रीकृष्ण ब्राह्मण की पूजा का लाभ प्रत्यक्ष अनुभव किया है; अतः वे तुम्हें इस विषय की सारी बातें बताएँगे॥3॥
 
Bhishmaji said – Yudhishthir! These great devotees of the fast have directly experienced the benefits of worshiping the most intelligent Lord Shri Krishna Brahmin; Therefore, he will tell you all the things about this subject. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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