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mahabharat 13.179.27: जो पंचभूतों के आश्रय हैं, उन्हीं श्रीकृष्ण ने आकाश की रचना की है। उन्हीं ने पृथ्वी, स्वर्ग और अंतरिक्ष की रचना की है। उन्हीं ने प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी वन और पर्वतों की रचना की है॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 13.179: भीष्मजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.179.27 
स विहायो व्यदधात् पञ्चनाभि:
स निर्ममे गां दिवमन्तरिक्षम्।
सोऽरण्यानि व्यसृजत् पर्वतांश्च
हृषीकेशोऽमितदीप्ताग्नितेजा:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जो पंचभूतों के आश्रय हैं, उन्हीं श्रीकृष्ण ने आकाश की रचना की है। उन्हीं ने पृथ्वी, स्वर्ग और अंतरिक्ष की रचना की है। उन्हीं ने प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी वन और पर्वतों की रचना की है॥ 27॥
 
Sri Krishna, who is the shelter of the five elements, has created the sky. He has created the earth, heaven and space. He, who is as radiant as a blazing fire, has created the forests and mountains.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)