Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.179.25: इन्हीं महात्मा वसुदेव ने एक बार अग्निरूप धारण करके खाण्डव वन के सूखे वनों में व्याप्त होकर पूर्ण तृप्ति का अनुभव किया था। ये सर्वव्यापी भगवान ही दैत्यों और सर्पों को जीतकर उन सबको अग्नि में होम कर देते हैं॥25॥ | mahabharat अध्याय 13.179: भीष्मजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स एकदा कक्षगतो महात्मा
तुष्टो विभुु: खाण्डवे धूमकेतु:।
स राक्षसानुरगांश्चावजित्य
सर्वत्रग: सर्वमग्नौ जुहोति॥ २५॥
अनुवाद
इन्हीं महात्मा वसुदेव ने एक बार अग्निरूप धारण करके खाण्डव वन के सूखे वनों में व्याप्त होकर पूर्ण तृप्ति का अनुभव किया था। ये सर्वव्यापी भगवान ही दैत्यों और सर्पों को जीतकर उन सबको अग्नि में होम कर देते हैं॥25॥
This same Mahatma Vasudev had once experienced complete satisfaction by taking the form of fire and pervading the dry woods of Khandava forest. It is this omnipresent Lord who vanquishes the demons and serpents and sacrifices them all in the fire. 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥