Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.179.23: ये यज्ञकर्ता श्रीकृष्ण प्रति मास यज्ञ करते हैं। प्रत्येक यज्ञ में वेदज्ञ ब्राह्मण उनकी स्तुति करते हैं। वे ही तीन नाभि, तीन धाम और सात घोड़ों वाले इस संवत्सर चक्र को धारण करते हैं। 23॥ | mahabharat अध्याय 13.179: भीष्मजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स मासि मास्यध्वरकृद् विधत्ते
तमध्वरे वेदविद: पठन्ति।
स एवोक्तश्चक्रमिदं त्रिनाभि
सप्ताश्वयुक्तं वहते वै त्रिधाम॥ २३॥
अनुवाद
ये यज्ञकर्ता श्रीकृष्ण प्रति मास यज्ञ करते हैं। प्रत्येक यज्ञ में वेदज्ञ ब्राह्मण उनकी स्तुति करते हैं। वे ही तीन नाभि, तीन धाम और सात घोड़ों वाले इस संवत्सर चक्र को धारण करते हैं। 23॥
These Yagya performers, Shri Krishna, perform Yagya every month. In every Yagya, Veda knowledgeable Brahmins sing his praises. They are the ones who hold this Samvatsara Chakra consisting of three navels, three Dhams and seven horses. 23॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥