श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.179.2 
कां वा ब्राह्मणपूजायां व्युष्टिं दृष्ट्वा महाव्रत।
तानर्चसि महाबाहो सर्वमेतद् वदस्व मे॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे व्रतों के महान भक्त महाबाहो! ब्राह्मणों की पूजा करते समय आप उनके पूजन से भविष्य में क्या लाभ चाहते थे? यह सब मुझे बताइए॥2॥
 
Mahabaho, the great devotee of vows! What were the future benefits of worshipping Brahmins that you were looking for while worshipping them? Tell me all this.॥2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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