श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  13.179.17 
स पौराणीं ब्रह्मगुहां प्रविष्टो
महीसत्रं भारताग्रे ददर्श।
स चैव गामुद्दधाराग्रॺकर्मा
विक्षोभ्य दैत्यानुरगान् दानवांश्च॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भरत! ये वही हैं जिन्होंने पूर्वकाल में ब्रह्मा रूप धारण करके प्राचीन गुफा में प्रवेश किया था और पृथ्वी को जलमग्न होते देखा था। इस सृष्टि के रचयिता कृष्ण ने दैत्यों, दानवों और नागों को व्याकुल करके इस पृथ्वी को रसातल से बचाया था॥ 17॥
 
Bharata! He is the one who in the past entered the ancient cave in the form of Brahma and witnessed the earth being submerged in water. Krishna, the creator of this creation, disturbed the demons, devils and serpents and rescued this earth from the abyss.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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