श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.179.16 
तमध्वरे शंसितार: स्तुवन्ति
रथन्तरे सामगाश्च स्तुवन्ति।
तं ब्राह्मणा ब्रह्ममन्त्रै: स्तुवन्ति
तस्मै हविरध्वर्यव: कल्पयन्ति॥ १६॥
 
 
अनुवाद
लोग यज्ञ में उनकी स्तुति करते हैं। स्तुति करने वाले विद्वान रथन्तर साम में उनकी स्तुति करते हैं। वेदों के ज्ञाता ब्राह्मण वेद के मन्त्रों से उनकी स्तुति करते हैं और यजुर्वेदी उन्हें अध्वर्यु यज्ञ में आहुति का भाग देते हैं। 16॥
 
People praise him in Yagya. The scholars who sing the praises sing his praises in Rathantara Sama. The Brahmins who are experts in the Vedas praise them with the mantras of the Vedas and the Yajurvedi give them a portion of the offerings in the Adhvaryu Yagya. 16 ॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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