Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.179.15: सैकड़ों गंधर्व, अप्सराएँ और देवता उनकी सेवा में सदैव उपस्थित रहते हैं। दैत्य भी उनसे परामर्श लेते हैं। वे ही धन के रक्षक और विजय के इच्छुक हैं॥ 15॥ | mahabharat अध्याय 13.179: भीष्मजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तं गन्धर्वाणामप्सरसां च नित्य-
मुपतिष्ठन्ते विबुधानां शतानि।
तं राक्षसाश्च परिसंवदन्ति
रायस्पोष: स विजिगीषुरेक:॥ १५॥
अनुवाद
सैकड़ों गंधर्व, अप्सराएँ और देवता उनकी सेवा में सदैव उपस्थित रहते हैं। दैत्य भी उनसे परामर्श लेते हैं। वे ही धन के रक्षक और विजय के इच्छुक हैं॥ 15॥
Hundreds of Gandharvas, Apsaras and Gods are always present in his service. Even the demons take advice from him. He alone is the protector of wealth and desires victory.॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥