Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.179.14: श्रीकृष्ण सर्वकर्मा, सर्वरूप, सर्वभोक्ता, सर्वसृष्टिकर्ता और जगत्विजयी हैं। वे एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में रक्त से भरा हुआ मूसल लिए हुए विकराल रूप धारण करने वाले हैं। अपने विविध कर्मों से जगत में विख्यात हुए श्रीकृष्ण की सभी लोग प्रशंसा करते हैं। | mahabharat अध्याय 13.179: भीष्मजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स विश्वकर्मा स हि विश्वरूप:
सविश्वभुग्विश्वसृग्विश्वजिच्च।
स शूलभृच्छोणितभृत् कराल-
स्तं कर्मभिर्विदितं वै स्तुवन्ति॥ १४॥
अनुवाद
श्रीकृष्ण सर्वकर्मा, सर्वरूप, सर्वभोक्ता, सर्वसृष्टिकर्ता और जगत्विजयी हैं। वे एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे हाथ में रक्त से भरा हुआ मूसल लिए हुए विकराल रूप धारण करने वाले हैं। अपने विविध कर्मों से जगत में विख्यात हुए श्रीकृष्ण की सभी लोग प्रशंसा करते हैं।
Shri Krishna is the universal karma, the universal form, the universal enjoyer, the universal creator and the world conqueror. He is the one who assumes a monstrous form with a trident in one hand and a mortar filled with blood in the other. Everyone praises Shri Krishna, who became famous in the world for his various deeds. 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥