| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन » श्लोक 12 |
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| | | | श्लोक 13.179.12  | यदा धर्मो ग्लाति वंशे सुराणां
तदा कृष्णो जायते मानुषेषुु।
धर्मे स्थित्वा स तु वै भावितात्मा
परांश्च लोकानपरांश्च पाति॥ १२॥ | | | | | | अनुवाद | | जब-जब धर्म की हानि होती है, तब-तब शुद्ध हृदय वाले श्री कृष्ण देवताओं और मनुष्यों के कुल में अवतार लेते हैं और स्वयं धर्म में स्थित होकर, उसका आचरण करते हुए, उसकी स्थापना करते हैं तथा परलोक और अधोलोक की रक्षा करते हैं। ॥12॥ | | | | When there is a decline in Dharma, then Shri Krishna, the one with a pure heart, takes incarnation in the family of gods and humans and being established in Dharma himself, practising it, establishes it and protects the other and the lower worlds. ॥12॥ | | ✨ ai-generated | | |
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