श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 179: भीष्मजीके द्वारा भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.179.11 
स एव पूर्वं निजघान दैत्यान्
स पूर्वदेवश्च बभूव सम्राट्।
स भूतानां भावनो भूतभव्य:
स विश्वस्यास्य जगतश्चाभिगोप्ता॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वे ही प्राचीन काल में दैत्यों का संहार करने वाले हैं और स्वयं दैत्यराज बलि के रूप में प्रकट हुए थे। ये भूतभावन भगवान भूत और भविष्य के स्वरूप हैं तथा इस सम्पूर्ण जगत के रक्षक हैं॥ 11॥
 
He is the one who killed the demons in ancient times and he himself appeared in the form of the demon king Bali. This Bhootbhavan Lord is the manifestation of the past and the future and he is the protector of this entire world.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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